“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

Kali

Kali, Remover of DarknessFirst of all Sati took the form of Kali. Her form was fearful, her hair untied and loose, her body the color of a dark cloud. She had deep set eyes and eyebrows shaped like curved swords. She stood on a corpse, wore a garland of skulls, and earrings made from the bones of corpses. She had four hands – on one hand she had the head of a skull, and the other a curved sword with blood dripping on it. She had mudras on her other two hands – one giving freedom from fear and the other giving blessings. She roared and the ten directions were filled with that ferocious sound. The exploits of this Goddess Kali are outlined in the Chandi Path. She is the Goddess that killed Chanda and Munda and also drank the blood of Raktabija. She is known as Kaushiki, She who came from within, and is the Slayer of Shumbha and Nishumbha. Kali is the first of the Das Mahavidyas. She is beyond time. She takes away the darkness and fills us with the light of Wisdom, which is why She is the embodiment of Jnana Shakti. She resides in the cremation grounds, where all creation dissolves.
1. काली : -

दस महाविद्या में काली प्रथम रूप है। माता का यह रूप साक्षात और जाग्रत है। काली के रूप में माता का किसी भी प्रकार से अपमान करना अर्थात खुद के जीवन को संकट में डालने के समान है। महा दैत्यों का वध करने के लिए माता ने ये रूप धरा था। सिद्धि प्राप्त करने के लिए माता की वीरभाव में पूजा की जाती है। काली माता तत्काल प्रसन्न होने वाली और तत्काल ही रूठने वाली देवी है। अत: इनकी साधना या इनका भक्त बनने के पूर्व एकनिष्ठ और कर्मों से पवित्र होना जरूरी होता है।

 

यह कज्जल पर्वत के समान शव पर आरूढ़ मुंडमाला धारण किए हुए एक हाथ में खड्ग दूसरे हाथ में त्रिशूल और तीसरे हाथ में कटे हुए सिर को लेकर भक्तों के समक्ष प्रकट होने वाली काली माता को नमस्कार। यह काली एक प्रबल शत्रुहन्ता महिषासुर मर्दिनी और रक्तबीज का वध करने वाली शिव प्रिया चामुंडा का साक्षात स्वरूप है, जिसने देव-दानव युद्ध में देवताओं को विजय दिलवाई थी। इनका क्रोध तभी शांत हुआ था जब शिव इनके चरणों में लेट गए थे।


 

* कालिका के प्रमुख तीन स्थान है : - कोलकाता में कालीघाट पर जो एक शक्तिपीठ भी है। मध्यप्रदेश के उज्जैन में भैरवगढ़ में गढ़कालिका मंदिर इसे भी शक्तिपीठ में शामिल किया गया है और गुजरात में पावागढ़ की पहाड़ी पर स्थित महाकाली का जाग्रत मंदिर चमत्कारिक रूप से मनोकामना पूर्ण करने वाला है।


* काली माता का मंत्र :

हकीक की माला से नौ माला 'क्रीं ह्नीं ह्नुं दक्षिणे कालिके स्वाहा:'

 
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