“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

"बिराजा (विराजा) देवी उत्कल शक्तिपीठ

2017-08-18 20:36:33, comments: 0

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भारत के ओडिशा राज्य (पूर्व में उड़ीसा या उत्कल) के जाजपुर जनपद (जिला-मुख्यालयः जाजपुर टाउन) में स्थित यह शक्तिपीठ मंदिर हिंदुओं का एक प्राचीन तीर्थस्थल है। यहां देवी सती के नाभि या नाड़ी गिरने की मान्यता है देवी सती के गिरे अंग के स्थान पर निर्मित इस शक्तिपीठ की अधिष्ठात्री देवी को देवी बिराजा (विराजा) या देवी गिरिजा के नाम से पूजा जाता है, जो देवी दुर्गा की दिव्य मूर्ति के रुप में यहां विराजमान हैं, जबकि देवी सती के साथ विराजमान भगवान शिव या भैरव भगवान जगन्नाथ के रुप में पूजे जाते हैं। यह शक्तिपीठ मंदिर बिराजा देवी मंदिर के नाम से विख्यात् है। मंदिर परिसर अत्यंत विशाल है, जहां बहुत सारे शिवलिंग और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी शोभायमान हैं। १३वीं शताब्दी में बना बिराजा मंदिर गिरिजा देवी मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है, जिसके गर्भगृह में शेर पर सवार बिराजा देवी के एक हाथ में भाला तो दूसरे हाथ में महिषासुर दैत्य की पूंछ विद्यमान है जाजपुर एक प्राचीन हिंदू तीर्थस्थल है, जिसका नाम राजा जजाति केशरी से पड़ा है। जाजपुर को देवी विमला के कारण विमलपुरी भी कहा जाता है। प्रसिद्ध बिराजा देवी मंदिर के कारण जाजपुर बिराज पीठ के नाम से भी प्रसिद्ध है, जो किसी समय ओडिशा राज्य की राजधानी भी रह चुका है। सिदयों से बिराज (विराज) क्षेत्र के रुप में विख्यात् रहा ओडिशा का यह पवित्र शहर ब्रह्मा के पंचक्षेत्रों में से एक माना जाता है, जो प्रसिद्ध दशाश्वमेध नामक यज्ञ की पावन-स्थली भी रहा चुका है। विभिन्न ऐतिहासिक मंदिरों के कारण ही जाजपुर को वैतरणी तीर्थ भी कहा जाता है। यहां के प्रसिद्ध मंदिरों में जगन्नाथ मंदिर, बराह, मंदिर, राम मंदिर, सिद्धेश्वर मंदिर, वेलेश्वर मंदिर, किलातेश्वर मंदिर, वरुणेश्वर मंदिर, छत्तिया बाता मंदिर और दशाश्वमेध घाट प्रमुख हैं, लेकिन बिराजा देवी मंदिर ही यहां का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है मान्यता है कि बिराजा देवी मंदिर के नवी गया में भक्तों द्वारा अर्पित किया गया चढ़ावा सीधे सागर (बंगाल की खाड़ी ) तक पहुंच जाता है। दुर्गा एवं काली पूजा के अवसर पर यहां उत्सवों की बहार देखते ही बनती है। दुर्गा पूजा के अवसर पर यहां आयोजित होने वाला कार-उत्सव खास आकर्षण है। यह शक्तिपीठ स्थल कोलकाता से लगभग ३३७ किमी., कटक से लगभग ७२ किमी. तथा ओडिशा राज्य की राजधानी भुवनेश्वर से लगभग १०० किमी. दूर स्थित है, जहां विराजमान मां बिराजा देवी की आराधना से भक्तों को हर तरह की सिद्धी प्राप्त होती है।

कैसे पहुंचे-
भुवनेश्वर (कटक शहर से लगभग २९ किमी. दूर) यहां का निकटतम हवाई-अड्डे है, जो जाजपुर से लगभग १२१ किमी. दूर स्थित है। हावड़ा-चेन्नई रेलमार्ग के मध्य जाजपुर नगर स्थित केवनझार रोड यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन है। जाजपुर से लगभग २७ किमी. दूर स्थित इस शक्तिपीठ स्थल के लिए अच्छी सड़क सेवा अपलब्ध है।

जाजपुर स्थित ओ.टी.डी.सी (ओडिशा पर्यटन विकास निगम) द्वारा संचालित बिराजा पंथशाला के साथ ही अन्य प्राइवेट होटल, लॉज एवं धर्मशालाये इत्यादि।

मां का दर्शन तो वैसे पूरे साल किया जा सकता है लेकिन शारदीय एवं वासन्ती नवरात्र का समय सबसे उत्तम है।

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