“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

RamTirth, Amritsar (लव-कुश की जन्मस्थली है रामतीर्थ)

2015-10-25 08:36:02, comments: 0

उत्तरी भारत का प्राचीन व ऐतिहासिक धार्मिक तीर्थस्थल वाल्मीकि आश्रम श्री रामतीर्थ अमृतसर-चोगावा रोड पर स्थित है। भगवान श्री रामचंद्र द्वारा  जब सीता जी का परित्याग किया गया तो लक्ष्मण सीता माता जी को श्री रामचंद्र के कहने पर जंगलों में छोड़कर  आए थे। तब ऋषि वाल्मीकि जी सीता को अपने आश्रम में ले गये व उन्हें आश्रय दिया। इसलिए इसे माता सीता जी की आश्रयी स्थली भी कहा जाता है। जहां पर माता सीता ने लव को जन्म दिया है। बताया जाता है कि माता सीता वहां बाउली में  स्नान करने गयी तो लव को भगवान वाल्मीकि के पास छोड़ गयी थी। लव खेलते हुए कहीं चला गया। भगवान वाल्मीकि ने लव के न मिलने से परेशान हो कुशा नामक घास से लव जैसा हूबहू नन्हा बालक बनाया जिससे उसका नाम कुश हुआ।
वाल्मीकि जी ने रामायण की  रचना  भी यहीं की थी। इसी आश्रम में दोनों बच्चों  लव, कुश को शस्त्र चलाने की शिक्षा भी दी थी। जब श्री रामचंद्र महाराज ने अश्वमेध यज्ञ के लिए घोड़ा छोड़ा तो यहीं पर लव-कुश ने उस घोड़े को पकड़ा था और श्री रामचंद्र जी के साथ युद्ध भी किया  था। यह मेला हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा  के दिन महर्षि वाल्मीकि और सीता माता की याद में मनाया जाता है। यहां पर प्राचीन श्री रामचंद्र मंदिर जगन्नाथपुरी मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, बाबा भोड़ेवाला मंदिर,राम, लक्ष्मण, सीता मंदिर, महर्षि वाल्मीकि जी का धूना, सीता जी  की कुटिया, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, सीता राम-मिलाप मंदिर जैसे प्रमुख पूज्यस्थल  हैं। इस स्थल पर बे-औलाद महिलाएं तथा बेघर लोग आकर बाऊली में नहाकर व ईंटों के छोटे-छोटे घर बनाकर मन्नत मांगते हैं कि हमें औलाद व घर की  प्राप्ति हो। मेले का मुख्य आकर्षण पूर्णमासी की रात को औरतें आटे के दीये देशी घी में जलाकर संगीतमय धुन में पवित्र सरोवर में नहाती हैं। यहां दूर-दूर से भारी संख्या में साधु, संत, फ$कीर सरोवर में स्नान करने के लिए आते हैं।

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