“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

Naina Devi Temple, Himachal Pradesh

2015-09-04 10:49:42, comments: 0

हिमाचल प्रदेश में स्थित नैना देवी की गणना प्रमुख शक्ति पीठों में होती है। इस स्थान पर सती माता के दोंनों नेत्र गिरे थे। मंदिर में भगवती मां के दर्शन पिण्डी रूप में होते हैं। श्रावण मास की अष्टमी तथा नवरात्रों में यहां बहुत से भक्त यात्रा करते हैं। मां के दरबार में भक्त मन्नतें मुरादें मांगते हैं और जिनकी मुरादें पूरी हुई होती हैं वह दंड वत प्रणाम करते हुए या गाजे बजे सहित माता नैना देवी के दरबार में हाजिरी भरते हैं। 

मार्ग परिचय

उत्तरी भारत के पंजाब राज्य में भाखड़ा नंगल लाईन पर आनंदपुर साहिब प्रसिद्ध स्टेशन है। इस स्थान से उत्तर दिशा की ओर शिवलिंग पर्वत के शिखर पर नैना देवी माता जी का भव्य मंदिर बना हुआ है। माता के भवन पर जाने के लिए नंगल से बस सेवा उपलब्ध होती है। लगभग तीन घण्टे का सफर तय करने के उपरांत नैना देवी पहुंचा जा सकता है। बस स्टैण्ड से नैना देवी के मंदिर पहुंचने के लिए लगभग दो किलोमिटर पहाड़ी मार्ग पैदल चढ़ना होता है। जिसे साधारणतया यात्री लगभग आधे घण्टे में सुविधा से पूरा कर लेते हैं।

मंदिर की निर्माण कथा

इस मंदिर के निर्माण तथा उत्पत्ति के विषय में कई दन्त कथाएं प्रचलित हैं परंतु यह कथा प्रमाणिक समझी जाती है। इस पहाड़ी के समीप के इलाकों में कुछ गुजरों की आबादी रहती थी। उसमें नैना नाम का गूजर देवी का परम भक्त था। वह अपनी गाय भैंस पशुओं को चराने के लिए शिवलिंग पहाड़ी पर आया करता था। इस पर जो पीपल का वृक्ष अब भी विराजमान है उसके नीचे आ कर नैना गूजर की एक अनब्याही गाय खड़ी हो जाती थी और उसके स्तनों से अपने आप दूध की धारा प्रवाहित होने लगती।

नैना गुजर ने यह दृश्य कई बार देखा था। वह यह दृश्य देखकर सोच विचार में डूब जाया करता था कि आखिर एक अनसुई गाय के थनों में इस पीपल के पेड़ के नीचे आकर दूध क्यों आ जाता है। एक दिन उसने पीपल के पेड़ के नीचे जाकर जहां गाय का दूध गिरता था। वहां पड़े सूखे पेड़ के पत्तों को हटाना आरंभ कर दिया। पत्तों को हटाने के उपरांत उसमें दबी हुई पिण्डी के रूप में मां भगवती की प्रतिमा दिखाई दी।

नैना गुजर ने जिस दिन पिण्डी के दर्शन किए उसी रात को माता ने स्वप्न में उसे दर्शन दिए और कहा कि, मैं आदि शक्ति दूर्गा हूं, तू इस पीपल पेड़ के नीचे मेरा स्थान बनवा दे। मैं तेरे ही नाम से प्रसिद्ध हो जाऊंगी।

नैना मां भगवती का परम भक्त था। उसने सुबह उठकर माता के मंदिर की नींव रख दी। जल्द ही माता की महिमा चारों तरफ फैलने लग पड़ी। भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने लगी। देवी के भक्तों ने मां का सुंदर और विशाल मंदिर बनवा दिया और तीर्थ नैना देवी के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर के समीप ही एक गुफा है, जिसे नैना देवी की गुफा कहते हैं।

 

Categories entry: Temple
« back

Add a new comment

Manifo.com - free business website