“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

नैना देवी — यहां गिरे थे मां सती के नयन (Naina Devi, Himachal Pardesh)

2016-03-17 05:20:19, comments: 0

 

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नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में है। यह शिवालिक पर्वत श्रेणी की पहाड़ियों पर स्थित एक भव्य मंदिर है। यह देवी के 51 शक्ति पीठों में शामिल है। नैना देवी हिंदूओं के पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। यह स्थान नैशनल हाईवे न. 21 से जुड़ा हुआ है। इस स्थान तक पर्यटक अपने निजी वाहनों से भी जा सकते हैं। मंदिर तक जाने के लिए उड़्डनखटोले, पालकी आदि की भी व्यवस्था है। यह समुद्र तल से 11000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
मान्यता है कि इस स्थान पर देवी सती के नेत्र गिरे थे। मंदिर में पीपल का पेड़ मुख्य आकषर्ण का केन्द्र है जो कि अनेकों शताब्दी पुराना है। मंदिर के मुख्य द्वार के दाई ओर भगवान गणेश और हनुमान कि मूर्ति है। मुख्य द्वार को पार करने के पश्चात आपको दो शेर की प्रतिमाएं दिखाई देगी। शेर माता का वाहन माना जाता है।

मंदिर के गर्भ ग्रह में मुख्य तीन मूर्तियां है। दाई तरफ माता काली की, मध्य में नैना देवी की और बाई ओर भगवान गणेश की प्रतिमा है। पास ही में पवित्र जल का तालाब है जो मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। मंदिर के समीप ही में एक गुफा है जिसे नैना देवी गुफा के नाम से जाना जाता है। पहले मंदिर तक पहुंचने के लिए 1.25 कि.मी. की पैदल यात्रा कि जाती थी परन्तु अब मंदिर प्रशासन द्वारा मंदिर तक पहुंचने के लिए उड़्डलखटोले का प्रबंध किया गया है।

मंदिर की निर्माण कथा

इस मंदिर के निर्माण तथा उत्पत्ति के विषय में कई दन्त कथाएं प्रचलित हैं परंतु यह कथा प्रमाणिक समझी जाती है। इस पहाड़ी के समीप के इलाकों में कुछ गुजरों की आबादी रहती थी। उसमें नैना नाम का गूजर देवी का परम भक्त था। वह अपनी गाय भैंस पशुओं को चराने के लिए शिवलिंग पहाड़ी पर आया करता था। इस पर जो पीपल का वृक्ष अब भी विराजमान है उसके नीचे आ कर नैना गूजर की एक अनब्याही गाय खड़ी हो जाती थी और उसके स्तनों से अपने आप दूध की धारा प्रवाहित होने लगती।

नैना गुजर ने यह दृश्य कई बार देखा था। वह यह दृश्य देखकर सोच विचार में डूब जाया करता था कि आखिर एक अनसुई गाय के थनों में इस पीपल के पेड़ के नीचे आकर दूध क्यों आ जाता है। एक दिन उसने पीपल के पेड़ के नीचे जाकर जहां गाय का दूध गिरता था। वहां पड़े सूखे पेड़ के पत्तों को हटाना आरंभ कर दिया। पत्तों को हटाने के उपरांत उसमें दबी हुई पिण्डी के रूप में मां भगवती की प्रतिमा दिखाई दी।

नैना गुजर ने जिस दिन पिण्डी के दर्शन किए उसी रात को माता ने स्वप्न में उसे दर्शन दिए और कहा कि, मैं आदि शक्ति दूर्गा हूं, तू इस पीपल पेड़ के नीचे मेरा स्थान बनवा दे। मैं तेरे ही नाम से प्रसिद्ध हो जाऊंगी।

नैना मां भगवती का परम भक्त था। उसने सुबह उठकर माता के मंदिर की नींव रख दी। जल्द ही माता की महिमा चारों तरफ फैलने लग पड़ी। भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने लगी। देवी के भक्तों ने मां का सुंदर और विशाल मंदिर बनवा दिया और तीर्थ नैना देवी के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर के समीप ही एक गुफा है, जिसे नैना देवी की गुफा कहते हैं।

नैना देवी मंदिर के प्रमुख त्योहार
नैना देवी मंदिर में नवरात्रि का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। वर्ष में आने वाले दोनों चैत्र मास और अश्‍विन मास के नवरात्रे में यहां पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां आकर माता नैना देवी की कृपा प्राप्त करते हैं। माता को भोग के रूप में छप्पन प्रकार कि वस्तुओं का भोग लगाया जाता है। श्रावण अष्टमी को यहां पर भव्य व आकषर्क मेले का आयोजन किया जाता है। नवरात्रे में आने वाले श्रद्धालुओं कि संख्या दोगुनि हो जाती है। बाकि अन्य त्योहार भी यहां पर काफी धूमधाम से मनाए जाते हैं।  मंदिर में भगवती मां के दर्शन पिण्डी रूप में होते हैं।  मां के दरबार में भक्त मन्नतें मुरादें मांगते हैं और जिनकी मुरादें पूरी हुई होती हैं वह दंड वत प्रणाम करते हुए या गाजे बजे सहित माता नैना देवी के दरबार में हाजिरी भरते हैं।

आवागमन
वायु मार्ग हवाई जहाज से जाने वाले पर्यटक चंडीगढ विमानक्षेत्र तक वायु मार्ग से जा सकते है। इसके बाद बस या कार की सुविधा ले सकते है। दूसरा नजदीकी हवाई अड्डा अमृतसर विमान क्षेत्र में है।

रेल मार्ग 
नैना देवी जाने के लिए पर्यटक चंडीगढ और पालमपुर तक रेल सुविधा ले सकते है। इसके पश्चात बस, कार व अन्य वाहनों से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। चंडीगढ देश के सभी प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग नैनादेवी दिल्ली से 350 कि.मी. कि दूरी पर स्थित है। दिल्ली से करनाल, चण्डीगढ, रोपड़ होते हुए पर्यटक नैना देवी पहुंच सकते हैं। सड़क मार्ग सभी सुविधाओं से युक्त है। रास्ते मे काफी सारे होटल हैं जहां पर विश्राम किया जा सकता है। सड़के पक्की बनी हुई है।

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