“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

Maa Durga 108 Names

2015-03-21 07:31:57, comments: 0
Maa Durga 108 Names
नवदुर्गा में भक्तों ने हर प्रकार की पूजा और विधान से मां दुर्गा को प्रसन्न करने के जतन किए। लेकिन अगर आप व्यस्तताओं के चलते ‍विधिवत आराधना ना कर सकें तो मात्र 108 नाम के जाप करें इससे भी माता प्रसन्न होकरआशीर्वाद देती है। 

सती, साध्वी, भवप्रीता, भवानी, भवमोचनी, आर्या, दुर्गा, जया, आद्या, त्रिनेत्रा, शूलधारिणी, पिनाकधारिणी, चित्रा, चंद्रघंटा, महातपा, बुद्धि, अहंकारा, चित्तरूपा, चिता, चिति, सर्वमंत्रमयी, सत्ता, सत्यानंदस्वरुपिणी, अनंता, भाविनी, भव्या, अभव्या, सदागति, शाम्भवी, देवमाता, चिंता, रत्नप्रिया, सर्वविद्या, दक्षकन्या, दक्षयज्ञविनाशिनी, अपर्णा, अनेकवर्णा, पाटला, पाटलावती, पट्टाम्बरपरिधाना, कलमंजरीरंजिनी, अमेयविक्रमा, क्रूरा, सुन्दरी, सुरसुन्दरी, वनदुर्गा, मातंगी, मतंगमुनिपूजिता, ब्राह्मी, माहेश्वरी, एंद्री, कौमारी, वैष्णवी, चामुंडा, वाराही, लक्ष्मी, पुरुषाकृति, विमला, उत्कर्षिनी, ज्ञाना, क्रिया, नित्या, बुद्धिदा, बहुला, ND बहुलप्रिया, सर्ववाहनवाहना, निशुंभशुंभहननी, महिषासुरमर्दिनी, मधुकैटभहंत्री, चंडमुंडविनाशिनी, सर्वसुरविनाशा, सर्वदानवघातिनी, सर्वशास्त्रमयी, सत्या, सर्वास्त्रधारिनी, अनेकशस्त्रहस्ता, अनेकास्त्रधारिनी, कुमारी, एककन्या, कैशोरी, युवती, यत‍ि, अप्रौढ़ा, प्रौढ़ा, वृद्धमाता, बलप्रदा, महोदरी, मुक्तकेशी, घोररूपा, महाबला, अग्निज्वाला, रौद्रमुखी, कालरात्रि, तपस्विनी, नारायणी, भद्रकाली, विष्णुमाया, जलोदरी, शिवदुती, कराली, अनंता, परमेश्वरी, कात्यायनी, सावित्री, प्रत्यक्षा, ब्रह्मावादिनी। 

मां दुर्गा के कल्याणकारी 32 नाम

या देवी सर्वभुतेषू मातृरूपेण सं‍‍स्थिता। नमस्तस्यै।। नमस्तस्यै।। नमस्तस्यै नमो नमः।। 
हे देवी, भगवती माता, विद्यादायिनी, शक्ति प्रदान करने वाली, लक्ष्मी प्रदान करने वाली को बारंबार नमस्कार है। भगवती चैतन्यरूप से इस संपूर्ण जगत को व्याप्त करके स्थित है, उनको नमस्कार है, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार है। भगवतीसे हमेशा अपने कल्याण की प्रार्थना करना चाहिए। अपनी आपत्ति (विपदा, तकलीफ) के नाश की कामना करनी चाहिए। भगवती ने देवताओं पर विपत्ति आने पर उनका कल्याण किया है। उनसे इस प्रकार प्रार्थना करें। जिसप्रकार पूर्व काल में अपने अभिष्ट की प्राप्ति होने से देवताओं ने जिनकी स्तुति की तथा देवराज इंद्र ने जिनके शरण में जाकर अपनी रक्षा मांगी। कल्याण ईश्वरी माता दुर्गा हमारा कल्याण और मंगल करें तथा सारी आपत्तियों का नाश करें। देवी से अपने शत्रुओं से बचने के लिए प्रार्थना करें। देवी स्वयं कहती है। मेरे भक्तों को अथवा जो मेरी शरण में आ जाता है, उसकी इच्छा मैं अवश्य पूर्ण करती हूं।यदिआप शत्रु (आंशिक, मानसिक, शारीरिक) से परेशान है तो निम्न बत्तीस (32) नामों का पाठ करें। आप नि:संदेह विजय प्राप्त करेंगे। नाम इस प्रकार है :- 
दुर्गा, दुर्गातिशमनी, दुर्गापद्धिनिवारिणी, दुर्गमच्छेदनी, दुर्गसाधिनी, दुर्गनाशिनी, दुर्गतोद्धारिणी, दुर्गनिहन्त्री, दुर्गमापहा, दुर्गमज्ञानदा, दुर्गदैत्यलोकदवानला, दुर्गमा, दुर्गमालोका, दुर्गमात्मस्वरूपिणी, दुर्गमार्गप्रदा, दुर्गम विद्या, दुर्गमाश्रिता, दुर्गमज्ञानसंस्थाना, दुर्गमध्यानभासिनी, दुर्गमोहा, दुर्गमगा, दुर्गमार्थस्वरूपिणी, दुर्गमांसुरहंत्रि, दुर्गमायुधधारिणी, दुर्गमांगी, दुर्गमाता, दुर्गम्या, दुर्गमेश्वरी, दुर्गभीमा, दुर्गभामा, दुर्गभा, दुर्गदारिणी। 
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