“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

इंदौर के प्रसिद्ध देवास टेकरी माता मंदिर ( मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी )

2017-09-28 16:11:47, comments: 0

 ऐसी मान्यता है कि माताओं की दोनों मूर्तियां स्वयंभू हैं और जागृत स्वरूप में हैं। सच्चे मन से यहां जो भी मन्नत मांगी जाती है। वह हमेशा पूरी होती है। विद्वानों के मुताबिक देवी के 52 शक्तिपीठ में से मां चामुंडा, तुलजा दरबार को एक शक्तिपीठ के तौर पर माना जाता है। हालांकि, ऐसा बताया जाता है कि देश के अन्य शक्तिपीठों पर माता के शरीर के हिस्से गिरे थे। लेकिन, यहां टेकरी पर माता का रुधिर गिरा था। इस कारण मां चामुंडा का प्राकट्य यहां हुआ। चामुंडा को सात माताओं में माना जाता है। तुलजा भवानी की स्थापना मराठी राज परिवारों ने करवाई थी। मराठी राजाओं की यह कुलदेवी मानी जाती हैं। यह दोनों माताएं सगी बहनें हैं। महाराज विक्रमादित्य के भाई भतृहरि यहां तपस्या कर चुके हैं। उन्हें दो हजार साल से ज्यादा हो गए हैं। ऐसे में मंदिर की प्राचीनता का कोई प्रमाण नहीं है। मंदिर अनादिकाल से है। लोक मान्यता है कि देवी मां के दोनों स्वरूप जागृत अवस्था में हैं। बड़ी मां तुलजा भवानी और छोटी मां चामुण्डा देवी बहनें हैं। ऐसी मान्यता है कि एक बार दोनों माताओं में किसी बात को लेकर विवाद हो गया। गुस्साई दोनों माता टेकरी छोड़कर जाने लगीं। बड़ी मां पाताल में और छोटी मां टेकरी ने नीचे उतरने लगीं। माताओं को जाता देख उन्हें मनाने के लिए बजरंगबली और भैरूबाबा उनके पीछे चल दिए। जब हनुमानजी उनके पास पहुंचे तो उनका रौद्र रूप देख एक पल के लिए वे भी सहम गए। विनती के बाद दोनों माताएं मान गईं। लेकिन जब तक बड़ी मां का गुस्सा शांत होता उनका आधा धड़ पाताल में समा चुका था। वहीं छोटी माता टेकरी से काफी नीचे उतर आईं थीं, इस कारण बड़ी मां और छोटी मां उसी रूप में टेकरी में रुक गईं

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