“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

​माता पार्वती के पसीने की बूंद से हुई इस पेड़ की उत्पत्ति

2017-10-10 18:04:16, comments: 0

माता पार्वती के पसीने की बूंद से हुई इस पेड़ की उत्पत्ति हिंदू धर्म में बेलपत्र का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति सच्च
माता पार्वती के पसीने की बूंद से हुई इस पेड़ की उत्पत्ति

हिंदू धर्म में बेलपत्र का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करता है और उन्हें बेलपत्र अर्पित करता है तो भगवान उसकी हर इच्छा पूरी करते हैं। क्या आपको पता है भगवान शिव पर बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है और इसके पीछे क्या कहानी छिपी हुई है, अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं.......

बेलपत्र की कहानी
स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती के पसीने की बूंद मंदृंचल पर्वत पर गिर गई और उससे बेल का पेड़ निकल आया। माता पार्वती के पसीने से बेल के पेड़ का उद्भव हुआ। माना जाता है कि इसमें माता पार्वती के सभी रूप बसते हैं। वे पेड़ की जड़ में गिरिजा के स्वरूप में, इसके तनों में माहेश्वरी के स्वरूप में और शाखाओं में दक्षिणायनी व पत्तियों में पार्वती के रूप में रहती हैं।

फलों में कात्यायनी स्वरूप व फूलों में गौरी स्वरूप निवास करता है। इस सभी रूपों के अलावा, मां लक्ष्मी का रूप समस्त वृक्ष में निवास करता है। बेलपत्र में माता पार्वती का प्रतिबिंब होने के कारण इसे भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है। भगवान शिव पर बेल पत्र चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामना पूर्ण करते हैं।

      

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