“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri)

2016-07-05 06:17:22, comments: 0

हिंदू धर्म के अनुसार, एक साल में चार नवरात्रि होती है, लेकिन आम लोग केवल दो नवरात्रि (चैत्र व शारदीय नवरात्रि) के बारे में ही जानते हैं। इनके अलावा आषाढ़ तथा माघ मास में भी नवरात्रि का पर्व आता है, जिसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा (5 जुलाई, मंगलवार) से होगा, जो आषाढ़ शुक्ल नवमी (13 जुलाई, बुधवार) को समाप्त होगी।


क्यों विशेष है ये नवरात्रि?

आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में वामाचार पद्धति से उपासना की जाती है। यह समय शाक्त (महाकाली की पूजा करने वाले) एवं शैव ( भगवान शिव की पूजा करने वाले) धर्मावलंबियों के लिए पैशाचिक, वामाचारी क्रियाओं के लिए अधिक शुभ एवं उपयुक्त होता है। इसमें प्रलय एवं संहार के देवता महाकाल एवं महाकाली की पूजा की जाती है।

इस गुप्त नवरात्रि में संहारकर्ता देवी-देवताओं के गणों एवं गणिकाओं अर्थात भूत-प्रेत, पिशाच, बैताल, डाकिनी, शाकिनी, खण्डगी, शूलनी, शववाहनी, शवरूढ़ा आदि की साधना की जाती है। ऐसी साधनाएं शाक्त मतानुसार शीघ्र ही सफल होती हैं। दक्षिणी साधना, योगिनी साधना, भैरवी साधना के साथ पंच मकार (मद्य (शराब), मछली, मुद्रा, मैथुन, मांस) की साधना भी इसी नवरात्रि में की जाती है।

 

ढ़ मास का नवरात्र आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा मंगलवार 5 जुलाई से शुरू होगा। इसे ग्रीष्म नवरात्र और गुप्त नवरात्र के रूप में भी जाना जाता है। आषाढ़ मास में दुर्गापूजन, शक्तिपूजन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। मां कामख्या की अर्चना इस नवरात्र में विशेष तौर पर की जाती है।

 
ऋतु परिवर्तन पर देवी आराधना की परंपरा
ज्योतिषाचार्य डा.राजनाथ झा के अनुसार भारतीय आदर्श परंपरा में ऋतु परिवर्तन होने पर मां दुर्गा की आराधना की जाती है। ऋतुओं के बदलने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होती हैं। इस मौसम में निरोग रहने को नियम और संयमपूर्वक रहकर मां शक्ति की पूजा की जाती है।
 
कलशस्थापना पर बन रहा शुभ संयोग
आचार्य प्रियेन्दु प्रियदर्शी के अनुसार मंगलवार को पुनर्वसु नक्षत्र में कलश स्थापना और बृहस्पतिवार को विजयादशमी अति शुभ फलदायी होगी। चार दिन पहले ही मंगल ग्रह वक्री से अपनी राशि वृश्चिक में मार्गी हुआ है। वहीं बृहस्पतिवार को दशमी तिथि होने से सिद्धियोग बन रहा है।
 
दुर्लभ शक्तियों के लिए तंत्र साधना
ज्योतिषी इंजीनियर प्रशांत कुमार के अनुसार गुप्त नवरात्र में दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति के लिए दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। इस दौरान तांत्रिक क्रियाएं , शक्ति साधना और महाकाल की पूजा होती है। इस पूजा में साधक कड़े नियमों का पालन करते हैं।
 
शनि,राहू और केतु से पीड़ितों की मिलता लाभ
आचार्य विपेन्द्र झा माधव के अनुसार इस नवरात्र में मां की आराधना, हवन आदि से शनि, राहू और केतु से पीड़ित व्यक्तियों को लाभ मिलता है। ये तीनों ग्रह तंत्र कारक माने जाते हैं। इसलिए इन ग्रहों से छुटकारा पाने के लिए तंत्र साधना की जाती है।
 
गुप्त नवरात्र में इनकी होती है पूजा
मां काली, तारा,भुवनेश्वरी, त्रिपुरसुंदरी, छिनमस्तिका, त्रिपुर भैरवी, धूमावति, बगलामुखी, मातंगी, मां कमला देवी ।
 
कलश स्थापना का शुभ मुहुर्त:-5 जुलाई
समय: सुबह 7.30 बजे से पहले
सुबह 9 बजे के बाद
कलश स्थापना की सामग्री:-
कलश, मिट्टी, पंचरत्न, लाल कपड़ा, नारियल आदि
ग्रीष्म नवरात्र
महासप्तमी, निशा पूजा : 11 जुलाई
महाष्टमी : 12 जुलाई, 
महानवमी: 13 जुलाई ,
विजयादशमी: 14 जुलाई
 
वर्ष में होते हैं चार नवरात्र:-
शारदीय नवरात्र: आश्विन मास(अक्टूबर)
माघी नवरात्र : माघ मास(जनवरी-फरवरी)
वासंतिक : चैत्र नवरात्र(अप्रैल)
ग्रीष्म-गुप्त नवरात्र: आषाढ़ मास(जुलाई)
 
नवरात्र में करें पाठ
-दुर्गा सप्तशती, इष्ट देवी के बीजमंत्र, दुर्गा कवच, दुर्गा शतनाम पाठ
-दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ नहीं करें तो अध्याय 4, 5 और 11 का पाठ ।
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