“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

Ganga Mata ji ki Aarti

2015-10-09 08:58:42, comments: 0




ॐ जय गंगे माता, श्री गंगे माता ।

जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥

जय गंगे माता ॥1॥

 

चन्द्र सी जो तुम्हारी जल निर्मल आता ।

शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ॥

जय गंगे माता ॥2॥

 

पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता ।

कृपा दृष्टि तुम्हारी त्रिभुवन सुख दाता ॥

जय गंगे माता ॥3॥

 

एक ही बार जो तेरी शरणागति आता ।

यम की त्रास मिटाकर परमगति पाता ॥

जग गंगे माता ॥4॥

 

आरती मात तुम्हारी जो जन नित्य गाता ।

अर्जुन वहीं सहज में मुक्ति को पाता ॥

जय गंगे माता ॥5॥

ओउम जय गंगे माता ।

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