“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

​जानिये सिंह कैसे बना माँ दुर्गा का वाहन​ ​सिंह की तपस्या

2017-10-01 09:54:41, comments: 0



*भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए
देवी पार्वती ने हजारों वर्ष तक तपस्या की*।
*कहते हैं उनकी तपस्या में इतना तेज़ था,
जिसके प्रभाव से देवी सांवली हो गईं।*
*इस कठोर तपस्या के बाद शिव तथा पार्वती
का विवाह भी हुआ एवं संतान के रूप में उन्हें
कार्तिकेय एवं गणेश की प्राप्ति भी हुई।*
*एक कथा के अनुसार भगवान शिव से विवाह के
बाद एक दिन जब शिव-पार्वती साथ बैठे थे,
तब भगवान शिव ने पार्वती से...
मजाक करते हुए काली कह दिया।*
*देवी पार्वती को शिव की यह बात चुभ गई और
कैलाश छोड़कर वापस तपस्या करने में लीन हो गईं।*
*इस बीच एक भूखा शेर...
देवी को खाने की इच्छा से वहां पहुंचा।
लेकिन चमत्कार तो देखिए,देवी को तपस्या में
लीन देखकर वह वहीं चुपचाप बैठ गया।*
*ना जाने क्यों शेर देवी के तपस्या को भंग नहीं
करना चाहता था। वह सोचने लगा कि देवी कब
तपस्या से उठें और वह उन्हें अपना आहार बना ले।*
*इस बीच कई साल बीत गए..
लेकिन शेर अपनी जगह डटा रहा।*
*कई वर्ष बीत गए लेकिन माता पार्वती अभी भी
तपस्या में मग्न ही थीं, वे तप से उठने का फैसला
किसी भी हाल में लेना नहीं चाहती थीं।*
*लेकिन तभी शिव वहां प्रकट हुए और देवी को
गोरे होने का वरदान देकर चले गए।*
*थोड़ी देर बाद माता पार्वती भी तप से उठीं
और उन्होंने गंगा स्नान किया।*
*स्नान के तुरंत बाद ही अचानक
उनके भीतर से एक और देवी प्रकट हुईं।
उनका रंग बेहद काला था।*
*उस काली देवी के माता पार्वती के भीतर से
निकलते ही देवी का खुद का रंग गोरा हो गया।*
*इसी कथा के अनुसार माता के भीतर से
निकली देवी का नाम कौशिकी पड़ा और गोरी हो चुकी
माता सम्पूर्ण जगत में ‘माता गौरी’ कहलाईं।*
*स्नान के बाद देवी ने...
अपने निकट एक सिंह को पाया,
जो वर्षों से उन्हें खाने की ललक में बैठा था।*
*लेकिन देवी की तरह ही वह वर्षों से एक तपस्या में था,
जिसका वरदान माता ने उसे अपना वाहन बनाकर दिया।
*देवी उस सिंह की तपस्या से अति प्रसन्न हुई थीं,
इसलिए उन्होंने अपनी शक्ति से उस सिंह पर
नियंत्रण पाकर उसे अपना वाहन बना लिया।*
 जय मॉ दुर्गा जय मॉ जगदम्बा

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