“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

हवन का महत्व और इस से जुड़े वैज्ञानिक तर्क

2017-04-09 10:10:48, comments: 0


भगवान की आराधना की कई विधियां हैं। सभी भक्त अपनी श्रद्धानुसार भगवान को प्रसन्न करने की चेष्टा करते हैं। इन्हीं विधियों में से एक है हवन। हवन अर्थात् देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना। इसे अग्रिहोत्र भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि हवन से देवता प्रसन्न होते हैं।

हवन के अंतर्गत कुंड में प्रज्जवलित अग्नि में आहूति दी जाती है। यह आहूति तुरंत ही देवताओं को प्राप्त हो जाती है। अत: हवन का विशेष महत्व माना गया है। देवताओं की पूजा करने के लिए हवन क्यों किया जाए? यह जिज्ञासा सहज ही उठती है। 

वास्तव में देवता सूक्ष्म शरीरवाले होते हैं अर्थात् वे दिखाई नहीं देते। अग्नि में हवन किए गए द्रव्य की गंध उनको प्राप्त होती है। वे इसी से तुरंत ही संतुष्टï होते हैं। इसीलिए स्वाहा बोलते हुए यज्ञ की पवित्र अग्रि में देवताओं को आहुतियां दी जाती हैं। देवताओं की प्रसन्नता से हवन करने वाले भक्तों की सारी मनोकामनाएं स्वत: ही पूर्ण हो जाती हैं और देवताओं की कृपा के साथ ही अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। 
ऐसा नहीं है कि हवन का सिर्फ धार्मिक महत्व है, इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। हवन से ही वातावरण शुद्ध होता है, वर्षा भी इसी से होती है। वर्षा से ही हमें जल, अन्नादि प्राप्त होता है। चूंकि हवन में कई औषधिय गुण वाली सामग्री प्रयुक्त की जाती है, जिससे हवन के धुएं में कई औषधिय गुण आ जाते हैं जिनसे वातावरण में मौजूद विषेले कीटाणु नष्ट हो जाते हैं साथ ही हमारी त्वचा की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

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