“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

श्रीकृष्ण ने बसाई थी ये तीन नगरी

2017-04-07 18:03:14, comments: 0

द्वारका- भारत के पश्चिम में समुन्द्र के किनारे पर बसी है। आज से हजारों वर्ष पूर्व भगवान कॄष्ण ने इसे बसाया था। कृष्ण मथुरा में उत्पन्न हुए, गोकुल में पले, पर राज उन्होंने द्वारका में ही किया। यहीं बैठकर उन्होंने सारे देश की बागडोर अपने हाथ में संभाली। द्वारका उस जमाने में देश की राजधानी बन गई थीं। बड़े-बड़े राजा यहां आते थे और बहुत-से मामले में भगवान कृष्ण की सलाह लेते थे। इस जगह का धार्मिक महत्व तो है ही, रहस्य भी कम नहीं है। कहा जाता है कि कृष्ण की मृत्यु के साथ उनकी बसाई हुई यह नगरी समुद्र में डूब गई। आज भी यहां उस नगरी के अवशेष मौजूद हैं।

इंद्रप्रस्थ- प्राचीन भारत के राज्यों में से एक था इंद्रप्रस्थ। महान भारतीय महाकाव्य महाभारत के अनुसार यह पांडवों की राजधानी थी। यह शहर यमुना नदी के किनारे स्थित था। वर्तमान में यह स्थान राजधानी दिल्ली में स्थित है। महाभारत काल में इसे पांडव पुत्रों के लिए बनवाया गया था। द्वारिका की तरह ही इस नगर का निर्माण भी मय दानव और भगवान विश्वकर्मा से ही संभव हो पाया था। पांडवों ने श्रीकृष्ण के साथ मय दानव की सहायता से उस शहर का सौन्दर्यीकरण किया। वह शहर एक द्वितीय स्वर्ग के समान हो गया।

बैकुंठ- बैकुंठ धाम को भगवान श्रीकृष्ण का धाम कहा जाता है। इस धार्मिक स्थान को कई नाम से जाना जाता है जैसे साकेत, गोलोक, परमधाम, ब्रह्मपुर आदि। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने अरावली की पहाड़ी पर कहीं छोटा-सा नगर बसाया था। भू-शास्त्र के अनुसार भारत का सबसे प्राचीन पर्वत अरावली का पर्वत है। मान्यता है कि यहीं पर श्रीकृष्ण ने बैकुंठ नगरी बसाई थी।

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