“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

किस कारण माता पार्वती अपनी कोख से किसी संतान को जन्म दे नही पायी ?

2015-10-03 07:17:23, comments: 0


ये कथा उस समय की जब माता सती ने अग्नि कुण्ड में कूदकर प्राण त्याग दिए तब महादेव ने उनके जाने के बाद शक्ति पीठ की स्थापना करने के बाद अमरनाथ गुफा में समादि ले ली थी. जब माता सती से पार्वती के रूप में आई. और वह महादेव को समादि से बाहर लेकर आना चाहती थी. तभी देवराज इन्दर ने अपने स्वार्थ के कारण कामदेव और रति को महादेव की समादि तोड़ने के लिए आदेश दिया. इस से काम देव ने माता पार्वती से बोला की हमे देवराज इन्दर ने आप की सहायता के लिए भेजा है. काम देव ने महादेव के माथे पर धनुष चला दिया था. जिस से महादेव तपस्या (समाधि ) से बाहर आ गए , और वे क्रोधित हो गए और उन्होंने अपनी तीसरी आँख से कामदेव को भसम कर दिया . जिस से कामदेव की पत्नी रति ने देव राज को ये अभिशाप दे दिया की आपने जिस राजगद्दी को बचाने के लिए हमे भेजा था वे राजगद्दी कभी सुरक्षित नही रहेगी हमेशा आपको असुरो का भय सताता रहेगा. इस पर रति ने माता पार्वती को भी ये अभिशाप दे दिया की आप कभी अपनी कोख से किसी संतान को जन्म नही दे  सकेगी. ऐसा इस लिए अभिशाप दिया गया. क्यों उस समय तारकासुर ने देवतओं पर हमला कर रखा था. तारकासुर की मृत्यु केवल महादेव पुत्र के हाथो सम्भब थी. उनके भय से देवराज इन्दर ने कामदेव को महादेव की समाधि तोड़ने के लिए भेजा था !

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