“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

इस देवी के मंदिर में प्रसाद नहीं बल्की चढ़ता हैं इंसानी खून, जानिए पूरी कहानी।​

2017-11-17 18:49:19, comments: 0


ये तो हम सभी जानते हैं की पुराने समय में अंधविश्वास बहुत फैला था, पहले के जमाने में देवी या अन्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए बलि प्रथा का चलन था। लेकिन अब इस प्रथा को समाप्त कर दिया गया हैं, ये अब कानूनी अपराध माना जाता हैं। लेकिन आपको बता दें की आज भी कई मंदिरों में इंसानी खून का भोग लगाया जाता हैं।

आज आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारें में बताने जा रहें हैं जहां आज भी इंसानी खून का प्रसाद चढ़ाया जाता हैं। से स्थान हैं बोरोदेवी मंदिर, यह मंदिर पश्चिम बंगाल में स्थित हैं। आप जानकर हैरान हो जायेंगे कि इस मंदिर में 500 वर्षों से इंसानी खून का भोग लगता आ रहा हैं। मान्यता हैं की इस मंदिर में बिना इंसानी खून का भोग लगाए आने वाले भक्त की पूजा सफल नहीं होती हैं। इस स्थान पर आज भी अष्टमी की रात्रि देवी काली की उपासना के दौरान इंसानी खून का भोग लगाया जाता हैं।

1831 में महाराजा हरेंद्र नारायण ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था और इसमें देवी काली की प्रतिमा की स्थापना कराई थी। इस मंदिर की वर्तमान प्रतिमा चावल से बनी हैं। माना जाता हैं कि इस प्राचीन प्रतिमा को इस मंदिर से हटा कर असम के मदन मोहन मंदिर में स्थापित कर दिया गया था।

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