“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

इस दुर्गा मंदिर की दुनिया भर में है मान्यता, नीम के वृक्ष में सुरक्षित हैं नौ दुर्गा की वेदियां

2017-04-25 20:10:53, comments: 0

लखनऊ: लखनऊ और बाहर से आने वाले भक्तों के लिए शहर का चंद्रिका देवी धाम मंदिर काफी प्रसिद्ध है। यहां नीम के पेड़ के नीचे मन्नत मांगने से हर किसी की मुराद पूरी हो जाती है। अट्ठारहवीं शताब्दी के इस मंदिर की मान्यता है की यहां जिसने भी आकर माता की पिंडी का दर्शन किया तो उनके सारे दुःख दूर हो जाते हैं।


यह मंदिर लखनऊ से सटे बीकेटी में बना है। इस प्राचीन मंदिर का जिक्र स्कन्द पुराण समेत अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी है। कहा जाता है की गोमती नदी के समीप स्थित महीसागर संगम तीर्थ तट पर एक पुरातन नीम के वृक्ष के कोटर इन नौ दुर्गाओं के साथ उनकी वेदियां चिरकाल से सुरक्षित रखी हुई हैं।

मंदिर के आस पास बेस गांव वालों के अनुसार पांडव ने द्रोपदी के सात इस तीर्थ पर आये थे और अश्वमेघ यज्ञ कर घोड़ा छोड़ा था। जिससे इस क्षेत्र के तात्कालिक राजा हंश्ध्वज द्वारा रोके जाने पर युधिष्ठर की सेना से उन्हें युद्ध भी करना पड़ा था। युद्ध के समय एक पुत्र सुधन्वा का माता के मंदिर में पूजा अर्चना करते रहने की वजह से उसे खुलते तेल में दाल दिया गया था। मां की कृपा से उसके शरीर पर कोई आंच नहीं आई थी।


मंदिर के पास बने महिसागर तीर्थ की भी अपनी मान्यता है। लोगों के अनुसार इस तीर्थ में घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने तप किया था। ये तीर्थ मनोकानिपूर्ति और पापों को नाश करने के लिए माना जाता है।

मंदिर की तीन दिशाओं में गोमती नदी है और एक तरफ संगम जो मंदिर को पर्यटन के लिहाज से भी ख़ास बनाता है। मंदिर की मान्यता और लोकप्रियता के चलते यहां हर महीने की अमावस्या को मेला लगता है। नवरात्र में यहां लगातार नौ दिनों तक मेला लगता है।


यह है मान्यता

-अट्ठारहवीं सदी के पूर्वार्ध से यहां मां चंद्रिका देवी का भव्य मंदिर बना हुआ है। ऊंचे चबूतरे पर एक मठ बनवाकर पूजा-अर्चना के साथ देवी भक्तों के लिए प्रत्येक महीने की अमावश्या को मेला लगता था, जिसकी परंपरा आअज भी जारी है


-श्रद्धालु अपनी मनोकाना पूरी करने के लिए मां के दरबार में आकर मन्नत मांगते हैं, चुनरी की गाँठ बांधते मनोकामना पूरी होती है। कई भक्त मंदिर परिसर में घंटा भी बांधते हैं और उनकी मन्नत पूरी होती है।

-स्कन्दपुराण के अनुसार द्वापर युग में घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने मां चंद्रिका देवी धाम स्थित महीसागर संगम में तप किया था। आज भी करोड़ों भक्त यहां महारथी वीर बर्बरीक की पूजा-आराधना करते हैं। 

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