“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

आज भी इस गुफा में रखा है भगवान गणेश का कटा हुआ सिर,

2015-12-08 14:54:29, comments: 0
  • सनातन धर्म में किसी भी शुभ काम का आरंभ भगवान गणेश के पूजन से आरंभ होता है। समस्त भारत में शायद ही काेई ऐसा व्यक्ति हाे जाे भगवान गणेश के बारे में न जानता हाे फिर चाहे उनका मनमाेहक बाल स्वरूप या माता-पिता काे समर्पित युवा स्वरूप अथवा ज्ञान के भण्डार से भरा उनका अलाैकिक स्वरूप ही क्याें न हाे। हिन्दू मान्यताआें के अनुसार गणेश यानि कि गण+ईश = गणाें के देवता भगवान शिव एवं माता पार्वती के पुत्र के सुगन्धित द्रव्याें के साथ निर्मित किया था।

    हम सब ये ताे भली प्रकार से जानते हैं कि किस तरह गणेश जी का मस्तक उन्हीं के पिता शिव के द्वारा काटा गया फिर एक हाथी के मस्तक काे कटे हुए मस्तक के स्थान पर स्थापित किया गया। असलियत में गणेश जी जन्म एवं स्वरूप मानव जाति काे प्रतीकात्मक रूप से ज्ञान देने के लिए बनाया गया है जैसे कि उनके सिर काे काटना अहंकार एवं अहम् काे खत्म करने का प्रतीक है तथा हाथी के मस्तक काे वहां लगाना उनके विचाराें में प्राैढ़ता एवं सहनशीलता के भावाें की आेर चिन्हित करता है।
     
    गणेश जी का कोई भी चित्रपट अथवा मूर्त रूप देखें तो उसमें उन्हें हाथी का सिर लगा देखा जाता है। क्या आप जानते हैं गणेश जी का असली सिर कहां है?   
     
    गणेश जी का असली सिर पाताल भुवनेश्वर गुफा में है। हिंदू धर्म शास्त्रों में जिस तरह के सिर का वर्णन किया गया है यह हूबहू वैसा ही है। उत्तराखंड में स्थित इस गुफ़ा में गणेश जी और भगवान शिव निवास करते हैं। इसके अतिरिक्त यहां प्राकृतिक रूप से केदारनाथ, बद्रीनाथ और अमरनाथ के दर्शन भी किए जा सकते हैं। जोकि बिल्कुल साक्षात तीर्थों के समान हैं। इस गुफा के गर्भ में बहुत से रहस्य समाएं हैं जिन्हें जानकर अश्चर्य होता है।
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