“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

Dasha-Mahavidyas



Mahavidyas (Great Wisdoms) or Dasha-Mahavidyas are a group of ten aspects of the Divine Mother Durga or Kali herself or Devi in Hinduism.The 10 Mahavidyas are Wisdom Goddesses, who represent a spectrum of feminine divinity, from horrific goddesses at one end, to the gentle at the other.
The development of Mahavidyas represents an important turning point in the history of Shaktism as it marks the rise of Bhakti aspect in Shaktism, which reached its zenith in 1700 CE. First sprung forth in the post-Puranic age, around 6th century C.E., it was a new theistic movement in which the supreme being was envisioned as female. A fact epitomized by texts like Devi-Bhagavata Purana, especially its last nine chapters (31-40) of the seventh skandha, which are known as the Devi Gita, and soon became central texts of Shaktism.
पुराणों अनुसार जब भगवान शिव की पत्नी सती ने दक्ष के यज्ञ में जाना चाहा तब शिवजी ने वहां जाने से मना किया। इस इनकार पर माता ने क्रोधवश पहले काली शक्ति प्रकट की फिर दसों दिशाओं में दस शक्तियां प्रकट कर अपनी शक्ति की झलक दिखला दी। इस अति भयंकरकारी दृश्य को देखकर शिवजी घबरा गए। क्रोध में सती ने शिव को अपना फैसला सुना दिया, 'मैं दक्ष यज्ञ में जाऊंगी ही। या तो उसमें अपना हिस्सा लूंगी या उसका विध्वंस कर दूंगी।'

 

हारकर शिवजी सती के सामने आ खड़े हुए। उन्होंने सती से पूछा- 'कौन हैं ये?' सती ने बताया,‘ये मेरे दस रूप हैं। आपके सामने खड़ी कृष्ण रंग की काली हैं, आपके ऊपर नीले रंग की तारा हैं। पश्चिम में छिन्नमस्ता, बाएं भुवनेश्वरी, पीठ के पीछे बगलामुखी, पूर्व-दक्षिण में धूमावती, दक्षिण-पश्चिम में त्रिपुर सुंदरी, पश्चिम-उत्तर में मातंगी तथा उत्तर-पूर्व में षोड़शी हैं और मैं खुद भैरवी रूप में अभयदान देने के लिए आपके सामने खड़ी हूं।' यही दस महाविद्या अर्थात् दस शक्ति है। बाद में मां ने अपनी इन्हीं शक्तियां का उपयोग दैत्यों और राक्षसों का वध करने के लिए किया था।

 

नौ दुर्गा : 1.शैलपुत्री, 2.ब्रह्मचारिणी, 3.चंद्रघंटा, 4.कुष्मांडा, 5.स्कंदमाता, 6.कात्यायनी, 7.कालरात्रि, 8.महागौरी और 9.सिद्धिदात्री।


दस महा विद्या : 1.काली, 2.तारा, 3.त्रिपुरसुंदरी, 4.भुवनेश्वरी, 5.छिन्नमस्ता, 6.त्रिपुरभैरवी, 7.धूमावती, 8.बगलामुखी, 9.मातंगी और 10.कमला।


प्रवृति के अनुसार दस महाविद्या के तीन समूह हैं।

पहला : - सौम्य कोटि (त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी, कमला),
दूसरा : - उग्र कोटि (काली, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी),
तीसरा : - सौम्य-उग्र कोटि (तारा और त्रिपुर भैरवी)।

Manifo.com - free business website