“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

नवरात्र-दुर्गापूजा (Special Navratri Vrat Katha)

नवरात्री दुर्गा के नव रूप – नवरात्र-दुर्गापूजा
नवरात्रि का त्योहार नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों में तीन देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है। पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरुपों (कुमार, पार्वती और काली), अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरुपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरुपों कीपूजा करते हैं।वासन्तिक नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति माता दुर्गा केउन नौ रूपों का भी पूजन किया जाता है। माता के इन नौ रूपों को नवदुर्गा के नामसे भी जाना जाता है। नवरात्रि के इन्हीं नौ दिनों पर मां दुर्गा के जिननौरूपों का पूजन किया जाता है वे हैं – पहला शैलपुत्री, दूसरा ब्रह्माचारिणी, तीसरा चन्द्रघन्टा, चौथा कूष्माण्डा, पाँचवा स्कन्द माता, छठा कात्यायिनी, सातवाँ कालरात्रि, आठवाँ महागौरी, नौवां सिद्धिदात्री।
Shri Durga Stuti  
मिट्टी का तन हुआ पवित्र , गंगा के स्नान से ,
अंत-करण हो जाये पवित्र , जगदम्बे के ध्यान से

सर्वे मंगल मांगल्ये,शिवे सर्वार्थ साधिके
 शरण्ये त्रम्बके गौरी,नारायणी नमोस्तुते


शक्ति-शक्ति दो मुझे,करूँ तुम्हारा ध्यान,
पाठ निर्विघ्न हो तेरा,मेरा हो कल्याण
 हृदय सिंहासन पर आ बेठो मेरी मात,
सुनो विनय म्म दीन की,जग-जननी-वरदात
सुन्दर दीपक घी भरा करूँ आज तैयार,
ज्ञान उजाला माँ करो,मेटो मोह अन्धकार
चन्द्र सूर्य की रौशनी चमके चमन अखंड,
सब में व्यापक तेज है ज्वाला का प्रचंड.
ज्वाला जग जननी मेरी,रक्षा करो हमेश
दूर करो माँ अम्बिके मेरे सभी कलेश
श्रधा और विश्वास से तेरी ज्योत जगाऊँ,
तेरा ही है आश्रा,तेरे ही गुण गाऊँ
तेरी अधभुत गाथा को पढूं में निश्चय धार,
साक्षात् दर्शन करूँ,तेरे जगत आधार
मन चंचल ते पाठ के समय जो ओगुन होए ,
दाती अपनी दया से ध्यान न देना कोए.
मैं अंजन मलिन-मन न जानू कोई रीत,
अट-पट वाणी को ही माँ ,समझो मेरी प्रीत
चमन के ओगुन बहुत है,करना नहीं ध्यान,
सिंहवाहिनी माँ अम्बिके,करो मेरा कल्याण
धन्य-धन्य माँ अम्बिके,शक्ति शिवा विशाल ,
अंग-अंग में रम रही ,दाती दीन दयाल

जय माता दी
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